सार्वजनिक आँकड़ों का उपयोग: दो पहलुओं की निष्पक्ष तुलना कैसे करें
सार्वजनिक आँकड़ों का उपयोग करते समय परिभाषा, अवधि और संग्रह विधि समझना जरूरी है। दो पहलुओं की निष्पक्ष तुलना कैसे करें—चार संकेत, एक अभ्यास और जरूरी सीमा के साथ समझें।
बुनियादी बात
सार्वजनिक आँकड़ों का उपयोग करते समय परिभाषा, अवधि और संग्रह विधि समझना जरूरी है। इस भाग में विषय को “दो पहलुओं की निष्पक्ष तुलना कैसे करें” वाले सवाल से समझा गया है। चार संकेतों को साथ पढ़ने से किसी एक शब्द के आधार पर बहुत बड़ा निष्कर्ष निकालने से बचा जा सकता है।
पहले तुलना की कसौटी तय करें
तुलना शुरू करने से पहले यह स्पष्ट करें कि तुलना किस प्रश्न का उत्तर दे रही है। “परिभाषा” तथा “अवधि” अलग प्रकार की जानकारी हो सकते हैं। समान नाम या समान दिखती प्रस्तुति के कारण उन्हें बिना संदर्भ एक ही कसौटी पर रखना उचित नहीं है। पहले दोनों का अर्थ और उपयोग लिखें।
अब “संग्रह विधि” और “सीमा” को तुलना की सहायक शर्तों के रूप में पढ़ें। जिन सूचनाओं का आधार अलग है, उनका अंतर अलग से बताएं। तुलना का अच्छा नतीजा हर बार किसी विजेता का चुनाव नहीं होता; कई बार उससे यह पता चलता है कि दोनों पहलू अलग सवालों में उपयोगी हैं।
पढ़ने के चार संकेत
- परिभाषा: इस हिस्से में मुख्य बात क्या है, इसे एक वाक्य में दर्ज करें।
- अवधि: पहले संकेत से इसका संबंध स्पष्ट है या अतिरिक्त संदर्भ चाहिए, यह पूछें।
- संग्रह विधि: इस हिस्से के लिए उपलब्ध आधार और अपनी व्याख्या को अलग रखें।
- सीमा: कौन सी जरूरी शर्त या सीमा अभी बाकी है, उसे साफ लिखें।
छोटा अध्ययन अभ्यास
दो काल्पनिक विवरण चुनें। दोनों के लिए एक ही तीन प्रश्न लिखें और उत्तर पास-पास रखें। जहाँ आधार अलग हो, वहाँ सीधा बड़ा या छोटा लिखने के बजाय अंतर का कारण दर्ज करें।
एक जरूरी सीमा
उपलब्ध संख्या को संदर्भ से अलग करके निष्कर्ष नहीं बनाना चाहिए। इस सीमा के साथ विषय पर अपना निष्कर्ष पढ़ें। जहाँ जानकारी अधूरी हो वहाँ अज्ञात हिस्सा लिखना, उसे कल्पना से भरने से अधिक स्पष्ट तरीका है।
आगे पढ़ने के लिए
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