सर्वे का नमूना किसे छोड़ता है यह भी पूछें
सर्वे का निष्कर्ष पढ़ते समय संख्या आकर्षित करती है।
किन लोगों से पूछा गया
सर्वे का निष्कर्ष पढ़ते समय संख्या आकर्षित करती है। उससे पहले यह पूछना उपयोगी है कि प्रश्न किन लोगों तक पहुँचा। केवल एक स्थान, समय या माध्यम से मिले उत्तर किसी बड़ी दुनिया का पूरा चित्र नहीं बन जाते। रिपोर्ट में नमूना चुनने का तरीका सहज भाषा में होना चाहिए। पाठक को समझ आए कि निष्कर्ष किस अनुभव के बारे में बोल रहा है और कहाँ उसकी पहुँच सीमित हो सकती है।
बाहर रह गए अनुभव
ऑनलाइन प्रश्न का उत्तर वे ही दे सकते हैं जिन तक वह पहुँचा और जिन्होंने उत्तर देने का निर्णय लिया। ऐसे काल्पनिक उदाहरण में अनुपस्थित लोगों की राय अपने आप मालूम नहीं हो जाती। वही बात किसी खास स्थान पर मिले व्यक्तियों से पूछे सवाल पर भी लागू होती है। छूटने की संभावना बताना सर्वे को बेकार कहना नहीं। इससे उसके उपयोग का दायरा अधिक ईमानदारी से समझा जा सकता है। अनजान अनुभव को अनुमान से भरना उचित नहीं है।
संख्या से पहले तरीका
बहुत उत्तर मिलना उपयोगी हो सकता है, लेकिन केवल बड़ी गिनती चयन की हर सीमा दूर नहीं करती। रिपोर्ट को उत्तर देने वालों की पहचान संबंधी जरूरी सामान्य जानकारी और संग्रह की अवधि बतानी चाहिए। निजी पहचान उजागर किए बिना भी विधि समझाई जा सकती है। किसी समूह की अनुपस्थिति हो तो उसे उचित स्पष्टता मिले। सभी पाठक शोध की तकनीकी भाषा नहीं जानते; आसान विवरण उन्हें निष्कर्ष पर स्वतंत्र सवाल करने की सामग्री देता है।
सवाल बेहतर बने
सर्वे का दावा साझा करने वाला व्यक्ति पहले उसके नमूने का परिचय पढ़े। यदि जानकारी न मिले तो यह कमी बताए, निश्चितता न बढ़ाए। निष्कर्ष को उसके सही दायरे में रखना कमजोर प्रस्तुति नहीं, अच्छी व्याख्या है। उत्तरदाताओं की राय मूल्यवान है और बाहर रह गए लोगों का अनुभव भी। दोनों का फर्क बचाकर ही चर्चा आगे बढ़ सकती है। बेहतर सार्वजनिक बातचीत में केवल कितनों ने कहा नहीं, किससे पूछा और किससे नहीं पूछा, यह सवाल भी बराबर जगह पाए। इससे पाठक आँकड़े का उपयोग करते हुए उसकी सीमा भूलने से बच सकता है।
