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उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति दर्शाती है कि पर्यावरणीय प्रतिबद्धताएं आर्थिक विकास में बाधा नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा प्रेरक हैं। उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों, सतत विकास के

समुद्रतट, गाँव और पवन ऊर्जा का सिनेमैटिक भारतीय सांकेतिक दृश्य
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मूल स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) — भारत सरकारमूल खबर पढ़ें ↗

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति दर्शाती है कि पर्यावरणीय प्रतिबद्धताएं आर्थिक विकास में बाधा नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा प्रेरक हैं।

उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों, सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता तथा देश भर में परिवारों, किसानों और समुदायों को सशक्त बनाने में स्वच्छ ऊर्जा की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया।

Vice-President Shri C. P. Radhakrishnan addressed the Valedictory Session of the Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026 at Bharat Mandapam, New Delhi, today. He said that environmental commitments are catalysts for India’s development, not hindrances to growth, and highlighted how India has demonstrated that economic progress and reduced dependence on fossil fuels can go hand in hand. Emphasising that the renewable energy transition must become a people’s movement, the Vice President highlighted India’s achievements in solar energy, the empowerment of households and farmers, and the importance of innovation and global cooperation. He also observed that India’s renewable energy transformation offers an inspiring model for the Global South. @mnreindia

— Vice-President of India (@VPIndia) November 5, 2026

भारत के आकार के एक विकासशील देश के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हुए तीव्र आर्थिक विकास को बनाए रखना संभव होगा या नहीं, इस संबंध में पहले व्यक्त की गई आशंकाओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से इन आशंकाओं का जवाब दिया है।

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित क्षमता 300 गीगावाट को पार कर गई है और देश ने वर्ष 2025 में अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य अपनी निर्धारित समय सीमा से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 3 गीगावाट से भी कम से बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है।

ये उल्लेख करते हुए कि सौर ऊर्जा से उत्पादित विद्युत की लागत कभी कोयला आधारित विद्युत की तुलना में कई गुना अधिक थी, जबकि अब यह भारत में विद्युत के सबसे सस्ते स्रोतों में शामिल है, उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सुदृढ़ नीतियों, निजी उद्यमों तथा राज्यों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में हाइड्रोजन ऊर्जा भारत में उत्साहजनक प्रगति हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति से आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन ऊर्जा अधिक किफायती हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत का नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन न केवल देश के लिए एक अनुकरणीय उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के लिए भी एक आदर्श है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में हासिल की गई प्रगति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन को सही साबित करती है कि पर्यावरणीय संबंधी प्रतिबद्धताएं विकास की प्रेरक हैं। इससे ऊर्जा की अधिक सुलभता, उद्योगों की लागत में कमी, रोजगार के अवसरों का सृजन और आयात पर निर्भरता में कमी सुनिश्चित हो रही है। उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “वर्ष 2040 की प्रौद्योगिकियां आज की प्रयोगशालाओं और स्टार्ट-अप से विकसित होंगी।” उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता के महत्व पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 65 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अभियान से जुड़ चुकें हैं और उन्हें किफायती स्वच्छ ऊर्जा की सुविधा प्राप्त हो रही है। उन्होंने आगे बताया कि पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत लगभग 30 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सौर पंपों से किसानों को डीजल पर होने वाले खर्च में बचत करने, अतिरिक्त आय सृजित करने तथा खाद्यान के साथ-साथ ऊर्जा के दाता आर्थात ‘ऊर्जादाता’ बनने में सहायता मिलती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत की जा रही पहलें दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों तक विद्युत की पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं, जहाँ पारंपरिक ग्रिड कनेक्टिविटी व्यवहार्य नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि विद्युत की उपलब्धता से शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, संचार और आजीविका के क्षेत्रों में अवसरों का विस्तार होता है और लोगों का जीवन बदलता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऊर्जा संबंधी समाधान शहरों, गांवों और दूरदराज की बस्तियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप होने चाहिए।

प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को जन आंदोलन बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एसा आंदोलन केवल सरकार के प्रयासों से संचालित नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षकों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में जन भागीदारी से न केवल नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि नए आर्थिक अवसरों का सृजन होगा, आजीविका के साधन विकसित होंगे और परिवारों की समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने ऊर्जा-दक्षता संबंधी कार्यप्रणालियां अपनाने, सोच-समझकर उपभोग करने और अपशिश्ट का जिम्मेदारीपूर्वक निपटान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयासों का सामूहिक प्रभाव सतत विकास में किसी नए विद्युत संयंत्र के योगदान जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आगामी दशक अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के भारत के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2070 भारत की विद्युत की मांग लगभग सात गुना बढ़ सकती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए स्वच्छ, विश्वसनीय और किफायती विद्युत के माध्यम से ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक है।

इस शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं को ठोस कार्यों में बदलने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "चर्चाओं को परियोजनाओं में और परियोजनाओं को विद्युत उत्पादन में बदलें।" उन्होंने वैश्विक सहयोग का आह्वान करते हुए कहा, "यदि विश्व को सूर्य के प्रकाश से आलोकित होना है, तो इसे मिलकर काम करने वाले हाथों के प्रयासों से आलोकित होने दें।"

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों, सरकारी विभागों, विक्रेताओं, ब्रांड मालिकों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को नवीकरणीय ऊर्जा में उत्कृष्टता पुरस्कार तथा पीएम सूर्य घर पुरस्कार प्रदान किए।

At the Valedictory Session of the Bharat Renewable Energy Summit & Expo 2026 at Bharat Mandapam, New Delhi, Vice-President Shri C. P. Radhakrishnan presented the Excellence in Renewable Energy Awards and PM Surya Ghar Awards to the best-performing States, government departments, vendors, brand owners and public sector banks. The awards recognise outstanding contributions and achievements in advancing renewable energy adoption and strengthening India’s clean energy ecosystem. @mnreindia

— Vice-President of India (@VPIndia) November 5, 2026

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय कुमार सूद तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी इस अवसर पर उपस्थित थे। इस शिखर सम्मेलन में साझेदार देशों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत के अग्रणियों, ज्ञान भागीदारों, प्रदर्शकों और अन्य प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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पीके/केसी/आरटी/आईएम/एनजे


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